Saturday, 24 March 2018

रामनवमी 2018: जानिए दुर्भल योग में कैसे करें श्रीराम जी की पूजा,जिससे बन जाएं सभी बिगड़े काम



संदीप कुमार मिश्र: जिनके नाम स्मरण मात्र से बन जाते है सभी बिगड़े काम।ऐसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के प्राकट्योत्सव की शुभ घड़ी का हर सनातनी बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करता है।हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म वसंत ऋतु, कर्क राशि व पुष्य नक्षत्र पर नवमी तिथि को मध्यान्ह यानी दोपहर में हुआ था।जैसा कि  इस बार नवमी तिथि का संयोग 25 मार्च 2018 यानि रविवार को पड़ रहा है।ऐसे में जो बात सबसे खास है वो ये कि इस बार भगवान श्रीराम का प्राकट्योत्सव पुष्य नक्षत्र के स्थान पर आद्र्रा नक्षत्र और मिथुन राशि में मनाया जाएगा।
इस प्रकार इस शुभ योग में पंचोपचार विधि से भगवान श्रीराम का पूजन करने से साधक को अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।
नवमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।
मध्य दिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक बिश्रामा॥
धर्माचार्यों और ज्योतिषाचार्यों का ऐसा कहना है कि वर्षो बाद आया ऐसा योग
कहा जा रहा है कि इस बार 25 मार्च 2018 को प्रात: 7 बजकर 03 मिनिट तक अष्टमी तिथि रहेगी और फिर नवमीं तिथि का शुरु हो जाएगी। शास्त्रोक्त भगवान श्री राम का जन्म नवमी तिथि में मध्यान्ह यानी दोहपर करीब 12 बजे नक्षत्रों के राजा पुष्य नक्षत्र में उस समय हुआ था जब चंद्रमा अपनी उच्च राशि कर्क में स्थिति था।वहीं ज्योतिष के अनुसार इस बार की नवमी तिथि के मध्यान्ह काल में यानी प्रात: 7 बजकर 04 मिनट से दोपहर 1 बजकर 34 मिनिट तक आद्र्रा नक्षत्र रहेगा और चंद्रमा मिथुन राशि पर होगा।इस लिहाज से ग्रहों की गणना के अनुसार ऐसा कई वर्षो बाद होना बताया जा रहा है कि भगवान राम का प्राकट्योत्सव पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि की बजाय आद्र्रा नक्षत्र और मिथुन राशि में मनाया जाएगा । जबकि इस बार पुष्य नक्षत्र 26 मार्च को दोपहर 11.53 बजे के उपरांत शुरु होकर 27 मार्च की सुबह 10.14 तक रहेगा।
विद्वतजनो का मानना है कि इस बार अष्टमी पूजन भी रामनवमी के दिन ही होगा। वैसे तो अष्टमी तिथि 24 मार्च को शुरु होगी, लेकिन सप्तमी तिथि पर अष्टमी का पूजन शास्त्रो में अनुचित बताया गया है। इस लिहाज से अष्टमी का विशेष पूजन भी भगवान राम के प्राकट्योत्सव के दिन ही संपन्न होगा।इसे भी आप एक अनूठा संयोग कह सकते हैं कि एक तरफ मां भगवती आदि शक्ति व दूसरी तरफ ब्रम्हांड नायक भगवान श्रीराम का पूजन,वंदन,अर्चन एक तिथि पर एक ही साथ संपन्न होगा जो कि जनसामान्य के लिए शुभ फलदायक है।
प्रभु श्रीराम ने भी किया था जगतजननी मां जगदम्बा का आवाहन
जैसा कि मानस में वर्णित है कि भगवान श्रीराम ने भी आदिशक्ति का आवाहन और पूजन किया था। कहते हैं कि भगवान श्री राम और रावण के बीच जब युद्ध चल रहा था, और रावण पर सभी अस्त्र शस्त्र बेकार हो रहे थे,तब देवगणों ने प्रभु श्रीराम से मां भगवती का आवाहन करने को कहा,और ये भी कहा कि 108 कमल पुष्पों से मां आदिशक्ति का पूजन करें।कहते हैं कि मां की आराधना पूजन के समय जब एक पुष्प कमल कम पड़ गया तब राजीव लोचन भगवान राम ने जैसे ही पुष्प की जगह मातारानी को अपनी आंख भेंट करने के लिए जैसे ही बाण उठाया,उसी समय  मां आदिशक्ति प्रकट हो गईं और भगवान राम को युद्ध में विजयी श्री का वरदान दिया था ।इसलिहाज से देखें तो यह अद्भूत संगम ही है कि अष्टमी को आदिशक्ति माता महागौरी और मर्यापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पूजन का योग एक साथ बन रहा है।
अष्टमी,नवमी तिथि में ऐसे करें पूजन
राम नवमी के साधक को प्रात: काल स्नानादि से निवृत्त होकर उत्तर दिशा में सुन्दर मण्डप बनाकर राम दरबार की मूर्ति, प्रतिमा या चित्र स्थापित करना चाहिए साथ ही हनुमान जी को विराजमान करके इस मण्डप में विराजमान माता सीता,प्रभु श्रीराम जी के साथ, लक्ष्मण, हनुमान जी का विविध उपचारों (जल, पुष्प, गंगाजल, वस्त्र, अक्षत, कुमकुम) आदि से पूजन करना चाहिए। पूजन के बाद आरती करना चाहिए।साथ ही रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।ऐसी कामना करनी चाहिए कि हे प्रभु आपके सर्वविघ्न दूर करने वाले और मंगल प्रदाता हैं  हे! नाथ आप मेरा प्रणाम स्विकार करें,इस दास से हुई गलती को माफ करें और हम पर अपनी कृपा दृष्टी बनाएं रखें।

प्रभु श्री राम परम कृपालु हैं
।।श्रीसितारामाभ्यां नम:।।
।।भव सागर चह पार जो पावा।राम कथा ता कहं द्ढ़ नावा।।
।।बिषइन्ह कहं पुनि हरि गुन ग्राम। श्रवन सुखद अरु मन अभिरामा।।

भावार्थ- जो संसार रुपी सागर को पार पाना चाहता है,उसके लिए तो श्रीराम जी की कथा द्ढ़ नौका के समान है। श्री हरि के गुणसमूह तो विषयी लोगों के लिए भी कानों को सुख देने वाले और मन को आनंद देने वाले हैं।
!! राम कथा के तेई अधिकारी ! जिनहि कि सत संगति अति प्यारी !!

भगवान नारायण के सातवें अवतार भगवान श्रीराम परम कृपालु हैं,परमकल्याणकर्ता हैं।गोस्वामी जी ने मानस में लिखा है कि नाम लेत भव सिंधु सुखाहीं... इस चौपाई के अनुसार माना जाता है कि यदि एक बार भी भगवान श्रीराम का नाम आत्मिक भाव से ले लिया जाए तो समस्त दुखों का अंत हो जाता है।।जय श्री राम।।