Thursday, 7 December 2017

‘निधिवन’जहां आज भी रास रचाते हैं लीलाधारी भगवान श्रीकृष्ण!

संदीप कुमार मिश्र: कृष्णं वंदे जगद्गुरुम् भगवान कृष्ण की लीलाओं का साक्षी और जन्मस्थली मथुरा वृंदावन।जो आस्था के साथ ही भाव और भक्ति का दिव्य साधना स्थली है। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से महज कुछ ही दूरी पर मां यमुना के पावन तट पर बसा है निधिवन।कहते हैं कि यही वो स्थान है जहां योगीराज भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के संग रासलीला रचाई थी ।वर्तमान में इस वन में सिर्फ वृक्ष ही वृक्ष हैं,जिन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो जैसे कोई नृत्य  मुद्रा में खड़ा हो।

दरअसल यहां पर ऐसी मान्यता है कि यह वृक्ष कोई साधारण वृक्ष नहीं बल्कि गोपियां हैं जो रात्री में स्त्री रुप धारण कर भगवान श्री कृष्ण के साथ रास रचाती हैं और भावविभोर हो जाती हैं ।निधिवन की सबसे खासबात ये है कि शाम ढ़लते ही यहां विहार कर रहे सभी पशु-पक्षी जाने कहां चले जाते हैं और पर्यटक,आने जाने वाले यात्री यहां से निकल जाते हैं।जब आप इस वन में आएंगे तो देखेंगे कि यहां वन के मध्य में एक  छोटा लेकिन बड़ा ही सुंदर मंदिर बना हुआ है।ये मंदिर श्रीराधारानी और भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर है।

इस मंदिर में पुजारी के द्वारा हर दिन भगवान की सेज सजाई जाती है और उनके लिए विधिवत श्रृंगार साम्रगी यहां रखी जाती है।ऐसी मान्यता है कि ब्रज की अधिष्ठात्री देवी राधा रानी इन्हीं श्रृंगार सामग्री से अपना श्रृंगार करती हैं और लीलाधारी प्रभु श्रीकृष्ण राधारानी के साथ रासलीला करने के बाद निधिवन परिसर में स्थापित रंग महल में शयन करते हैं। रंग महल में आज भी प्रसाद (माखन मिश्री) प्रतिदिन रखा जाता है।सुबह बिस्तरों की सिलवटों को देखकर ऐसा लगता है कि यहां निश्चित ही कोई रात्रि विश्राम करने आया और प्रसाद भी ग्रहण किया है।इसीलिए जब अगले दिन यहां श्रद्धालु आते हैं और प्रसाद स्वरुप श्रृंगार सामग्री और सिंदूर पाते हैं तो स्वयं को धन्य मानते हैं।

मथुरा और वृंदावन में वैसे तो अनेक मंदिर हैं, लेकिन सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र निधिवन ही है।जो कि कन्हैया और राधारानी की रास स्थली है। निधिवन लगभग दो ढ़ाई एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।जहां कोई भी वृक्षसीधा नहीं खड़ा है,वृक्षों की डालियां नीचे की ओर झुकी हुई आपस में गुंथी हुई नृत्य मुद्रा में नजर आती है।

बेहद खास है निधिवन
जब आप निधिवन आएंगे तो देखेंगे कि यहीं पर विश्व प्रसिद्ध ध्रुपद के जनक संगीत सम्राट श्री स्वामी हरिदास जी की जीवित समाधि है।साथ ही  रंग महल, बांके बिहारी जी का प्राकट्य स्थल, राधारानी बंशी चोर आदि दर्शनीय स्थान है। कहा जाता है कि निधिवन में नित्य रात्रि में होने वाली श्रीकृष्ण की रासलीला को देखने की चेष्टा करने वाला अंधा, गूंगा, बहरा, पागल और उन्मादी हो जाता है जिससे कि वो किसी से भी इस रासलीला का जिक्र ना कर सके।


निधिवन में रात 8 बजे के बाद दिनभर दिखाई देने वाले पशु-पक्षी, बन्दर, भक्त, पुजारी सभी यहां से चले जाते हैं और परिसर के मुख्यद्वार पर ताला लगा दिया जाता है।कहते हैं कि जो भी रात में इस वन में रुक जाता है वह सांसारिक बन्धन से मुक्त हो जाता हैं।