Tuesday, 19 December 2017

क्या गुजरात में कांग्रेस के अपने पाले हुए भस्मासुर पड़ गए भारी ?


संदीप कुमार मिश्र: देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस।जिसकी तरकश में सभी जंग खाए पुराने तीर पड़े हुए हैं।जिसके दम पर पार्टी आगे बढ़ने का दम भरती है,जिसका परिणाम है कि एक के बाद एक लगातार चुनाव दर चुनाव कांग्रेस देश में अपनी सियासी जमीन खोती जा रही है।क्या कहना गलत होगा कि कांग्रेस के अपने पाले हुए नेता अब विकराल भस्मासुर बनते जा रहे हैं! यदि ऐसा नहीं है तो क्या कारण है हर बार पराजय का सामना कांग्रेस को करना पड़ रहा है।ये बात हम सभी जानते हैं कि एक स्वस्थ लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए विपक्ष का सशक्त होना बेहद जरुरी है, लेकिन क्या ऐसा नहीं लगता कि कांग्रेस के पाले हुए खुद के भस्मासुर बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार करने में बेहद कारगर साबित हो रहे हैं।

दरअसल ऐसा कहना इसलिए पड़ रहा है कि कांग्रेस के नव निर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए जमकर पसीना बहाया और कड़ी मेहनत की इसमें किसी को शक नहीं होना चाहिए। इस बात से इत्तेफाक गुजरात की राजनीति पर नजर रखने वाले भी रखते हैं।क्योंकिगुजरात चुनाव की जब सुगबुगाहट हुई तो एक बार ऐसा लगने लगा था कि राहुल गांधी कुछ कर के ही मानेगें और गुजरात चुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में काफी हद तक आ सकते हैं।यही वजह है कि गुजरात चुनाव के पहले चरण तक कांग्रेस खूब भारी पड़ती नजर आ रही थी।

तभी कांग्रेस के तमाम भस्मासुर नींद से जागे और शब्दों की मर्यादा उसी तरह से तार-तार करने लगे जिस प्रकार 2014 के लोकसभा चुनाव में किया था।बिल्कुल सही समझे आप- मणिशंकर अय्यर कांग्रेस की तरकश से निकला मणिशंकर का एक बयान कांग्रेस को भरे संग्राम में हराने के लिए काफी था।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर मणिशंकर के एक बयान ने ('नीच') दूसरे चरण में भाजपा को ऐसा मुद्दा दे दिया, जिससे खेल बदल गया।मानो बीजेपी इसी की फिराक में बैठी थी।ऐसे तो कांग्रेस में ऐसे भस्मासुरों की लंबी फेहरिस्त है लेकिन टाप पर रहने की आदत मणिशंकर को ही है!
गुजरात में 22 साल से सत्ता पर काबिज बीजेपी के लिए गुजरात का चुनाव साख का विषय बन गया था, क्योंकि गुजरात प्रभानमंत्री जी का गृह राज्य था।वहीं गुजरात विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए भी किसी साख के विषय से कम नहीं था।वो इसलिए कि एक तरफ तो राहुल गांधी अध्यक्ष बनने वाले थे और दूसरा 22 साल एंटी इनकमबेंसी फैक्‍टर का भरपूर लाभ मिलने का पूरा अवसर था। साथ ही कुछ तथाकथित आंदोलनकारीयों का साथ भी मिल रहा था।तभी तो राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।
मौके की नजाकत को और हवा के रुख को समझते हुए बीजेपी ने पीएम मोदी सहित अपने सभी दिग्‍गज नेताओं को गुजरात चुनाव में जोर शोर से लगा दिया था। खुद पीएम मोदी ने गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा की।क्योंकि बीजेपी जानती थी कि कांग्रेस को एंटी इनकमबेंसी फैक्‍टर का लाभ मिल सकता है।इसीलिए चुनाव के पहले फेज में जहां राहुल गांधी ने सिर्फ 11 रैलियों को संबोधित तो वहीं मोदी जी ने 19 रैलियों को संबोधित किया। कांग्रेस का पास मुद्दों की भरमार थी,जैसे नोटबंदी, जीएसटी, महंगाई,किसानो की मस्याएं,रोजगार,शिक्षा जैसे मुद्दों से जनता परेशान थी और इसका लाभ उसे मिल सकता था, और एक बार तो ऐसा लगने लगा भी था कि गुजरात में कांग्रेस कोई बड़ा उलटफेर कर सकती है।लेकिन ऐसा हो ना सका।
क्योंकि इस बीच कांग्रेस का काम तमाम करने के लिए उसी के अपने बयानवीर श्रीमान मणिशंकर अय्यर ने ऐसा विवादित बयान दिया कि भाजपा को जीत का मंत्र मिल गया और खामियाजा कांग्रेस को एक बार फिर भुगतना पड़ा। मणिशंकर अय्यर ने मोदी जी के लिए कहा कि, 'ये आदमी बहुत नीच किस्म का है। इसमें कोई सभ्यता नहीं है। अब ये बात कहीं ना कहीं बीजेपी के साथ पूरे गुजरात के अस्मिता से जोड़कर बीजेपी ने खूब प्रचार किया।यहां तक कि पीएम मोदी ने अपनी कई रैलियों में इस बयान का जिक्र किया। मणिशंकर द्वारा कहे गए 'नीच' शब्‍द को मोदी जी ने गुजरातियों का अपमान बताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

जबकि राहुल गांधी ने इस बयान को अनुचित करार दिया,मणिशंकर को कारण बताओं नोटिस जारी करते हुए कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित भी कर दिया। लेकिन अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत...अब तो बहुत देर हो चुकी थी।

खैर इसी प्रकार राम मंदिर मुद्दे को लेकर माननिय सुप्रिम कोर्ट में चल रही बहस में कपिल सिब्बल का सुनवाइ को टालने वाला बयान हो या फिर गुजरात को जातिगत रुप से बांटने का प्रयास करना।ऐसे तमाम मुद्दे थे जिनका बीजेपी ने भरपूर फायदा उठाया क्योंकि बात जब गुजराती अस्मिता की हो तो गुजरात की आवाम उसे कभी पसंद नहीं करेगी,और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के सबसे चहेते लोकप्रिय सीएम रहे हैं और गुजरात की जनता ने बड़े ही जोश और उत्साह से उन्हें देश का वजीरेआला बनाकर दिल्ली की सत्ता पर काबिज किया है।इसलिए उनका अपमान कैसे बर्दास्त कर सकती थी,परिणाम आपके सामने हैं...हां ये अलग बात है कि बीजेपी के स्थानिय नेताओं से जनता जरुर नाराज थी लेकिन कांग्रेस उसका लाभ नहीं ले पाई और उपर से उसके अपने भस्मासुर.....।।।