Monday, 18 December 2017

जानें: खरमास में क्या करें क्या ना करें: क्यों खरमास में सूर्य का तेज हो जाता है मंद


संदीप कुमार मिश्र: धार्मिक आस्थाओं और मान्यताओं का देश है भारत। यहां हर एक कार्य शुभ मुहूर्त,लग्न और नक्षत्र देखकर कार्य किए जाते हैं। ऐसे में ये जानना जरुरी है होता है कि आने वाला समय दिन और माह आपके लिए कैसा रहेगा। आपको बता दें कि 15 दिसंबर को सूर्यदेव का वृश्चिक राशि को छोड़कर धनु राशि में शनि के मिलन के साथ प्रवेश हुआ है।जिस वजह से हर प्रकार के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है और खर मास की शुरुआत हो जाती है।

दरअसल इस बार खरमास का प्रारंभ15 दिसंबर 2017 से शुरु हुआ,जो कि 14 जनवरी 2018 तक रहेगा। हिंदू मतावलंबी, धर्मशास्त्रों और ज्योतिषशास्त्र में खरमास को बहुत ही पूजनीय बताया गया है।हमारे वेद,पुराणों में खरमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।
आईए जानते हैं कि पवित्र खरमास में क्या करना चाहिए-

खरमास में गेहूं, चावल, सफेद धान, मूंग, जो, तिल, कटहल, आम, सौंठ, जीरा, आंवला, सुपारी सेंधा नमक नहीं खाना चाहिए।इस पवित्र माह में किसी भी विवाद से बचना चाहिए साथ ही किसी देवता, गुरु, गाय, स्त्री की निंदा भी नहीं करनी चाहिए।धर्म ग्रंथों में ऐसा कहा गया कि पुरुषोत्तम मास में जमीन पर सोना, पत्तल में भोजन करना और संध्या को एक समय भोजन करना चाहिए।

क्या आप जानते हैं कि खरमास में सूर्यदेव का तेज मंद हो जाता है ?  
खरमास में सूर्यदेव वृश्चिक राशि से निकलकर गुरु की राशि धनु में पौष संक्रांति या धनु संक्रांति पर पहुंच रहे हैं।ऐसे में धनु संक्रांति काल में सूर्यदेव की साधना और उपासना का विशेष महत्व बताया गया है।

क्या आप जानते हैं कि इस माह को खरमास क्यों कहा जाता है?
एक प्राचीन कथा के अनुसार एक बार सूर्यदेव अपने सातों घोड़ों से सजे रथ में भ्रमण कर रहे थे।काफी थक जाने के बाद घोड़े प्यास से व्याकुल हो उठे,और रास्ते में जब तालाब दिखा तो सूर्यदेव ने अपने रथ को रोक दिया और घोड़ों को पानी पिलाने लगे। पानी पीने के बाद घोड़े और थकान से भर गए,जिसपर सूर्यदेव को स्मरण हुआ कि सृष्टि के नियमानुसार उन्हें निरंतर ऊर्जावान होकर चलते रहने का सर्वोपरि आदेश मिला हुआ है।


इसी उधेड़बुन में सूर्यदेव को तालाब के निकट दो गधे नजर आते हैं।तभी सूर्यदेव अपने घोड़ों को छोड़कर गधों को अपने रथ में जोतकर वहां से चल दिए।जिसकी वजह से सूर्यदेव की गति इस पूरे माह मंद हो जाती है और सूर्यदेव का तेज कम हो जाता है औऱ फिर पुनः मकर राशि में प्रवेश करने के समय एक माह पश्चात वह अपने सातों घोड़ों पर सवार हो जाते हैं।इसीलिए इस पूरे माह कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।