Saturday, 30 July 2016

शुभ संयोग का सावन(श्रावण) : 50 वर्ष बाद बना है ऐसा योग

संदीप कुमार मिश्र: मित्रों ऐसे तो सावन सदा ही भक्तों के लिए मंगलकारी रहा है,लेकिन साल 2016 का सावन विशेष संयोग लेकर आया है।हमारे देश में अत्यधिक वर्षा होगी,जिससे किसानो को लाभ मिलेगा तो दूसरी तरफ धार्मिक नजरिये से इस बार सावन के चारों सोमवार पर शिव की विसेष कृपा भक्तों पर बरसेगी। ज्योतिषविद् पंडित शिव कुमार शुक्ल जी का कहना है कि इस बार के चारों सोमवार शुभ संयोग बना रहे हैं।
दरअसल साल 2016 में सावन का आगमन प्रतिपदा तिथि और उत्तर आषाढ़ नक्षत्र में यानि 20 जुलाई को हुआ है। पंडित जी का कहना है कि 50 वर्ष बाद इस बार सावन में ऐसा संयोग बना है कि, रोजगार, आय, ज्ञान और कृषि क्षेत्र में वृद्धि होगी।वहीं रोग,शोक का नाश भी ग्रहों को परिवर्तन से होगा।
साल 2016 में पड़ने वाले सावन के सोमवार विशेष क्यों ?
प्रथम सोमवार-: 25 जुलाई को जैसा कि हम सब जानते हैं कि प्रथम सोमवार है जो कि धृति योग में है ।और इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी कुछ समय तक रहेगा।कहा जाता है कि इस योग नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा करने से बाधाओं से मुक्ति मिलती है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है।
द्वितिय सोमवार-: सावन का द्वितिय सोमवार 1 अगस्त को है और ये वज योग में पड़ रहा है। इस दिन भी विशेष रुप से सर्वार्थ सिद्धि योग है। इस दोनों योगों के कारण श्रावण मास का द्वितिय सोमवार विशेष फलदायक बन जाता है। धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि ऐसे संयोग में महादेव की स्तुति करने से साधक को शक्ति मिलती है और जीवन में सुख, स्वास्थ्य, संपन्नता आती है।
तृतिय सोमवार-: श्रावण मास का तृतिय सोमवार 8 अगस्त को साद्य योग में पड़ रहा है।वास्तव में इस योग को साधना और भक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। जो भी साधक इस दिन आदिदेव महादेव की पूजा सच्चे मन से करता है कि उसके कठिन से कठिन कार्य भी पूर्ण हो जाते हैं।
चतुर्थ सोमवार-:इस वर्ष श्रावण मास का चतुर्थ सोमवार 15 अगस्त को है,जिस दिन आयुष्मान योग होगा ।और इस बार चतुर्थ सोमवार प्रदोष व्रत को साथ लेकर आ रहा है। हम सब जानते हैं कि प्रदोष व्रत भी भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन शिव की अराधना करने वाले भक्तों,जातकों की आयु में वृद्धि होती है,आर्थिक परेशानियों दूर होती है और जीवन में आने वाले संकट से भगवान शिव हमारी रक्षा करते हैं।
वहीं आपको बता दें कि 31 जुलाई, 1 अगस्त और 2 अगस्त का दिन भी विशेष मंगलकारी है। 31 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत और त्रयोदशी दोनो है,सात ही 1 अगस्त को सोमवार और शिव रात्रि पूजा के साथ ही 2 अगस्त को भौमवती आमावस्या होने से शिव की पूजा का महत्व विशेष रुप से बढ़ जाता है।
शिव साधना से मनोवांछित फल की होती है प्राप्ति
सर्वविदित है कि माता पार्वती ने पति रूप में भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले श्रावण सोमवार का विशेष व्रत किया था।तभी से सोमवार के व्रत का शिव की साधना,आराधना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिये हिन्यू धर्म शास्त्रों में विशेष महत्व बताए गए हैं।कहते हैं जो भी सौभाग्यवती स्त्री अपने पति की लंबी आयु, अपने बच्चों की रक्षा के साथ ही अपने भाई की सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत को करती हैं उनपर महादेव की विशेष कृपा होती है।वहीं इस व्रत को पुरूष साधक संतान, धन-धान्य प्राप्त करने के लिए करते हैं।

।।।भगवान शिव,महादेव आप सब का कल्याण करें...हर हर महादेव।।।

सावन शिवरात्रि पर विशेष संयोग

(इस बार 1 अगस्त 2016 को शिवरात्रि है,जो कि सोमवार को है।इस लिए इस बार की शिवरात्रि भक्तों को विशेष फल देने वाली है,सोमवार को पड़ने वाली शिवरात्रि का फल अनंत गुणा बढ़ जाता है,ऐसा हमारे धर्म शास्त्र कहते हैं। )
संदीप कुमार मिश्र:  ऊं नम : शिवाय...शिव..सावन..और सोमवार...भक्तों का लगाए बेड़ा पार...सावन का द्वितिय सोमवार यानी 1 अगस्त 2016 को सावन शिवरात्रि है।हमारे हिन्दू धर्म में सावन शिवरात्रि का अति विशेष महत्व बताया गया है। हमारे देश में जहां साल में एक महाशिवरात्रि मनायी जाती है तो वहीं साल के प्रत्येक महीने में एक मासिक शिवरात्रि मनायी जाती है। जबकि सावन के महीने के अर्ध माह में सावन शिवरात्रि मनायी जाती है।
शिवरात्रि की कथा एवं इतिहास
दरअसल मासिक शिवरात्रि या महाशिवरात्रि एवं सावन शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है।हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार सावन शिवरात्रि के दिन व्रत करने से भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होता है और रोग शोक का नाश होता है।
श्रावण शिवरात्रि की कथा
वेदों पुराणों और हिन्दू धर्म ग्रंथो में कहा गया है कि सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव जी लिंग रूप में धरा पर प्रकट हुए थे, और सबसे पहले भगवान शिव जी के लिंग रूप को भगवान ब्रह्मा और विष्णु जी के द्वारा पूजन किया गया था। पौराणिक परम्परा के अनुसार शिव भक्त शिवरात्रि के दिन शिवलिंग की पूजा करते है। हिन्दू पुराणों की माने तो शिवरात्रि व्रत प्राचीन काल से ही मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है की देवी लक्ष्मीं, सरस्वती, गायत्री, सीता, पार्वती और रति ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था।
सावन शिवरात्रि का महात्म्य
श्रावण शिवरात्रि का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि हमारे देश में महिलाएं,पुरुष व बच्चे सभी इस व्रत को भक्तिभाव से करते हैं।शिव भक्त शिवरात्रि की रात से ही जग कर शिव जी की पूजा अर्चना व भजन-किर्तन करते हैं। सावन शिवरात्रि की साधना करने से जीवन में सुख और शांति की प्राप्ति होती है। भगवान शिव जी की कृपा से साधक के साभी बिगड़े काम सरलता से बन जाते है।
सोमवार को शिवरात्रि का शुभ मुहर्त है मंगलकारी
धार्मिक मतावलबियों के अनुसार यदि सावन शिवरात्रि सोमवार को पड़े तो भक्तों के लिए बहुत ही शुभ और मंगलकारी होता है। वहीं शिवरात्रि का शुभ समय मध्य रात्रि बताया जाता है। इसलिए भगवान शिव के भक्तों को भोलेनात की पूजा मध्य रात्रि में करनी चाहिए और इस शुभ मुहर्त को ही निशिता काल कहा जाता है।
सावन में पड़ने वाली शिवरात्रि को कांवर यात्रा भी कहा जाता है कंवर या कांवर एक खोखले बांस को कहते हैं।सावन में शिव भक्त कंवरियास या कांवांरथी के रूप में जाने जाते है। हमारे तीर्थ स्थानों खासकर हरिद्वार, गौमुख व गंगोत्री, सुल्तानगंज में गंगा नदी, काशी विश्वनाथ, बैद्यनाथ, नीलकंठ और देवघर सहित अन्य स्थानो से गंगाजल भरकर, शिव भक्त स्थानीय शिव मंदिरों में इस पवित्र जल को लाकर महादेव का अभिषेक करते हैं।
हमारे धर्म शास्त्रों में समुद्र मंथन से कांवड़ का संबंध बताया गया है।कहते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने विष का प्याला पी लिया था तो वो नकारात्मक ऊर्जा से पीड़ित हुए और जब त्रेता युग में रावण ने शिव का ध्यान किया और वह कंवर का उपयोग करके, गंगा के पवित्र जल को लाकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया,जिससे  भगवान शिव से जहर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हुई। इसलिए भी कांवड़ का विशेष, महत्व सावन में बताया गया है।हर हर  महादेव।।।

Monday, 25 July 2016

यूपी की सियासत की सीढ़ी जातिवाद ...!

संदीप कुमार मिश्र: जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी की सरकार ने पूर्ण बहुमत हासिल कर इतिहास रचा है।तभी से तमाम सियासी पार्टियां केंद्र सरकार की कमियां ढ़ुंढ़ने में लग गयी है।चुनाव दर चुनाव राज्यों में बीजेपी की साख कहीं बढ़ रही है जिससे कई पार्टियों को अपने अस्तित्व पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है।ऐसा इसलिए भी कि आम चुनाव 2014 में हर एक जात धर्म संप्रदाय के लोगों ने लोकतंत्र के इस महाउत्सव में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और बेरोजगारी के खिलाफ,भ्रस्टाचार के खिलाफ, घपलों-घोटालों के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया और और विकास के नाम पर वोट दिया।
लेकिन फिर भी हमारे देश में जातिवाद की जड़े इतनी गहरी हैं कि जिसे उखाड़ कर फेंकना शायद बहुत मुश्किल होगा...कहना गलत नहीं होगा कि जातिवाद की सियासत खत्म हो जाए तो कुकुरमुत्ते की तरह अनगिनत पार्टियों की सदस्यता रद्द हो जाए।
दरअसल सवाल इसलिए उठता है कि एक तरफ तो हम विकाश और तरक्की की बात करते हैं और दूसरी तरफ जातिगत समीकरण को साधने की कोशिश करते हैं...ऐसे में मुश्किल खड़ी हो जाती है कि सही और गलत का मुल्यांकन कैसे हो। अब उत्तर प्रदेश को ही ले लिजिए..देश का सबसे बड़ा सूबा है सो सियासत भी बड़ी-बड़ी ही होगी...खासकर चुनाव हो तो जातिगत,वंशवाद के लिहाज से समीकरण बैठाने का दौर शुरु हो गया है...चार बड़ी मुख्य पार्टियों को ही आप यूपी में देख लें तो सत्ता लोभ का सारा समीकरण नजर आ जाएगा..

स्वत: लिखी हुई कविता के कुछ अंश...

कोई खेले ब्राम्हण कार्ड तो कोई फांसे दलित समाज..

कोई कहे राम हैं मेरे, तो कोई टोपी पहन पढ़े नमाज..

21वीं सदी के नव भारत में,नहीं बदल रहा है आज !

जातिवाद के चक्कर में पड़कर,हो रहा युवा बरबाद...

कैसे आगे बढ़ेगा देश, जड़ जमा चुका है वंशवाद..

कोई कहे देवी हूं मैं,मेरा सदा करो सत्कार

सत्ता के लोभियों ने मिलकर,कर दिया देश का बंट्टाधार...

अरे! अब तो उठो जागो...

यूवा भारत चाह रहा है,देश का नित निरंतर हो सम्मान..

कैसे होगा संभव ये जब..

जाति,धर्म और संप्रदाय के बंधन में बंधा रहेगा हिन्दुस्तान..

देख रहा है विश्व हमें अब,उत्सुकता भरी निगाहों से..

देखो दूर नहीं दिन वो जब..संसार कहेगा भारत महान...भारत महान

लेकिन शर्त बस एक हैं-

हम बदलेंगे यूग बदलेगा..अब नहीं होगा किसी का अपमान..

क्रमश:………………………

बड़ा दिलचस्प होगा देखना कि देश के सबसे बडे सूबे में कांग्रेस,सपा,बसपा और भाजपा की लड़ाई में जीत किसकी होती है,और यूपी का सिंहासन कौन जीतता है लेकिन जिस प्रकार से कुर्सी की इस लड़ाई में जाति-धर्म के नाम पर सियासी रंग चढ़ने लगा है उससे कहीं ना कहीं राजनीति का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।

sandeep kumar mishra
सियासत और जातिवाद का गहरा नाता है...और खासकर यूपी,बिहार से..ऐसा इसलिए भी कि मेरी जन्मभूमि है यूपी..इसलिए जो देखा,जो पढ़ा और जो जाना उससे निष्कर्ष यही निकलता है कि ना तो जातिवाद यूपी से खत्म हुआ ना होगा...क्योंकि जब तक खुद को देवी,देवता कहने वाले लोग राजनीति में रहेंगे तब तक कभी भी उत्तर प्रदेश का भला नहीं होगा...सर्व धर्म समभाव की भावना से ही प्रदेश और देश का भला हो सकता है..ये बात सियासी दलों को जितनी समझने की आवश्यकता है...उतनी ही आम जनमानस और अंध भक्तों को भी...जो भेंड़ की तरह चलने में सिर्फ यकीन रखते हैं...।

Sunday, 24 July 2016

सरल सुलभ श्रावण(सावन) सोमवार व्रत विधि, महत्व और विधान

संदीप कुमार मिश्र: ऐसे तो प्रत्येक दिन पाक और पवित्र है।हर दिन ईश्वर की साधना और भक्ति के लिए बना है लेकिन सावन के सोमवार का विशेष महत्व है,सावन के सोमवार व्रत की महिमा अनंत है,अपरंपार है।हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के घर पर शरीर त्यागने से पहले भगवान भोलेनाथ को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण भी किया था। अपने दूसरे जन्म में माता पार्वती ने सावन(श्रावण) माह में ही निराहार रह कर कठोर तप साधना की थी और भगवान शिव को पति स्वरुप पाया था ।तभी सावन का महात्म्य अति विशेष हो गया और संपूर्ण सृष्टी शिवमय हो गई।
कहते हैं कि सावन (श्रावण)में जो भी विवाह योग्य लड़कियां इच्छित वर पाने के लिए सभी श्रावण सोमवार का व्रत रखती हैं,उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।सोमवार के व्रत में भगवान शिव के अलावा शिव परिवार यानि माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी और गणेश जी की भी पूजा अर्चना की जाती है। सावन के व्रत सभी साधक चाहे वो स्त्री हों या पुरुष सभी रख सकते हैं।ऐसे भी सोमवार को उपवास रखना हमारे धर्म शास्त्रों में श्रेष्ठ बतलाया गया है।

श्रावण(सावन)में  कैसे करें शिव पूजन
सावन(श्रावण) के प्रथम सोमवार के दिन प्रात: और सायंकाल स्नान के बाद,भगवान  शिव की सपरिवार पूजा करें।विशेष ध्यान रखें कि पूजा पूर्वामुखी या उत्तर दिशा की ओर होकर ही करें।कुश का आसन उपयोग मे लाएं और बैठकर पूजा करें। पंचामृत(दूध, दही,घी, शक्कर, शहद व गंगा जल)से शिव परिवार को स्नान करवाना चाहिए।ततपश्चात फल, सुगंध, रोली,चंदन, फूल, व वस्त्र शिव परिवार को अर्पित करने चाहिए। शिवलिंग पर सफेद पुष्प, बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद वस्त्र के साथ ही सफेद मिष्ठान चढ़ाने चाहिए।गणेश जी को दूर्वा(हरी घास) लड्डू,मोदक, व पीले वस्त्र भक्तों को अर्पित कना चाहिए।और फिर महादेव की आरती या शिव चालीसा पढ़ना चाहिए।साथ ही भगवान गणेश जी की आरती करनी चाहिए।ऐसा करने के बाद समस्त शिव परिवार से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए और क्षमा प्रार्थना कर प्रणाम करना चाहिए।
श्रावण सोमवार के सभी व्रधारी को आदिदेव महादेव की स्तुति दिन में दो बार करनी चाहिए।सूर्योदय में और सूर्यास्त के बाद। 

        

 भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए साधक को मंत्र जाप अवस्य करना चाहिए।जो इस प्रकार से है..कहते हैं इस मंत्र में बड़ी शक्ति है और इस मंत्र साधना से भगवान शिव प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं -
 !!  ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्जवलांग         परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम !!


 इसके अलावा शिव भक्त साधारण एवं सर्वाधिक सर्वप्रिय पंचाक्षरी  मंत्र ओम् नम: शिवाय और गणेश मंत्र ओम् गं गणपतये नम: का जाप भी कर सकते हैं। इस प्रकार से श्रावण सोमवार का पुण्य फल प्राप्त किया जा सकता है।बम बम भोले।

शिव सावन और सोमवार : खोलें सुख के द्वार

संदीप कुमार मिश्र: शिव और सावन का बड़ा ही गहरा संबंध हैं और सोमवार भगवान शिव का दिन है तो ऐसे में शिव की महिमा और सावन के सोमवार का महत्व बढ़ जाता है। दोस्तों भगवान यानि परमेश्वर के कई नाम हैं जिसमें शिव, महेश्वर, रुद्र, पितामह, विष्णु, संसार वैद्य, सर्वज्ञ और परमात्मा प्रमुख आठ नाम है। जबकि तेईस तत्वों से पहले प्रकृति और  प्रकृति से उपर शंकर हैं और शंकर से उपर शिव हैं इसलिए  उन्हें महेश्वर कहा जाता है।कहते हैं कि देवी के रूप में प्रकृति हैं और शंकर रूप में पुरुष परमेश्वर शिव के वशीभूत हैं। वहीं रूद्र का भाव है कि जिसका जन्म रोदन यानि दुख से हुआ हो।कहने का भाव है कि दु:ख तथा दु:ख के कारणों को दूर करने के कारण ही भगवान शिव रुद्र कहलाते हैं। परमेश्वर जगत के मूर्तिमान पितृ होने के कारण पितामह कहलाए जाते हैं, सर्वव्यापी होने के कारण विष्णु कहलाए जाते हैं, मानव के भव रोग दूर करने के कारण संसार वैद्य कहलाए जाते हैं,और संसार के समस्त कार्य जानने के कारण सर्वज्ञ कहलाए जाते हैं।साथ ही स्वयं से पृथक अन्य आत्मा के अभाव के कारण वह परमात्मा कहलाए जाते हैं।इस प्रकार का विशेष गुढ़ रहस्य गुरुदेव भगवान बतलाते हैं।
 मित्रों श्रावण के प्रथम सोमवार पर परमेश्वर के सुंदर सौम्य स्वरुप सोमेश्वर अर्थात सोमनाथ से संबंधित महात्म्य, उपाय और पूजन विधान के बारे में जानते हैं।दरअसल द्वादश ज्योतिर्लिंगों के क्रम में सोमनाथ अर्थात सोमेश्वर प्रथम ज्योतिर्लिंग के रुप में जाना जाता है।हमारे धर्म शास्त्र स्कंद पुराण के प्रभास खंडानुसार सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का नाम प्रत्येक नई सृष्टि के साथ बदल जाएगा।जैसा कि माता पार्वती के प्रश्नो का उत्तर देते हुए भगवान शिव कहते हैं कि सोमनाथ के आठ नाम पूर्ण हो चुके हैं तथा जब इस वर्तमान सृष्टि का अंत हो जाएगा,उसके बाद ब्रह्मा जी द्वारा नई सृष्टि की रचना होगी र फिर इस ज्योतिर्लिंग का नाम 'प्राणनाथ' हो जाएगा।वहीं इस सृष्टि से पूर्व सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को स्पर्शलिंग के नाम से जाना जाता था। पुराण में इस बात को भी बताया गया है कि पूर्व सृष्टि में मनुष्य शिव से अनभिज्ञ थे।
सोमनाथ भगवान की विशेष कृपा पाने के लिए विशेष उपाय और पूजन करना चाहिए।प्रातः उठकर नित्य कर्म से निवृत होकर यथासंभव सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए।सात ही पूजा के लिए सफेद आसन का प्रयोग करना चाहिए और सबसे पहले घर में विराजित पारद शिवलिंग अथवा शिवालय में जहां सफेद शिवलिंग प्रतिष्ठित हो वहां शिवलिंग को शुद्ध स्वच्छ जल से अभिषेक कराना चाहिए व गौ घृत में चंदन मिश्रीत कर दीपक दिखाना चाहिए। चंदन की सुगंध की दो अगरबत्ती भी जलानी चाहिए। मंदाकिनी यानि सफेद कनेर के फूल शिव जी को चढ़ाएं। ॐ नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण करते हुए शिव जी पर  बिल्वपत्र (बेलपत्र) पर चंदन लगाकर चढ़ाने चाहिए। और फिर दूध में शर्करा (शक्कर) मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।सफेद चंदन से शिवलिंग पर त्रिपुंड साधक को बनाना चाहिए और गाय के दूध से बने पकवान का शिव जी को भोग लगाना चाहिए।साधक को बाएं हाथ में शतावरी का टुकड़ा लेकर दाएं हाथ से दो मुखी रुद्राक्ष या फिर सफ़ेद चंदन की माला से इस निचे लिखे मंत्र का जाप करना चाहिए।

मंत्र: ॐ श्रीं सोमेश्वराय शशि मौळये नमः शिवाय।।


जब जाप पूरा हो जाए फिर बाएं हाथ में ली हुई शतावरी का टुकड़ा सफेद कपड़े में बांधकर घर के ईशान कोण में वर्ष भर तक छुपाकर रख देना चाहिए। इस प्रकार के विशेष पूजन और उपाय से मनुष्य के जीवन में आने वाले हर प्रकार केरोग,शोक, कष्ट, व्याधि, पीड़ा, जैसी समस्त परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में कुटुंब में सुख समृद्धि का वास होता है ।बम बम भोले।ऊं नम: शिवाय।

सावन(श्रावण) सोमवार व्रत रखनें से पहले कुछ आवश्यक बातें


संदीप कुमार मिश्र: हमारे हिन्दू धर्म ग्रंथों में आसी कहा गया है कि सावन(श्रावण) सोमवार का व्रत करने वाले साधक के हर प्रकार के रोग,शोक,दु:ख,दारिद्रता और समस्त परेशानियों का नाश हो जाता है और साधक के जीवन उन्नती,तरक्की,खुशहाली आती है साथ ही व्रती सुखी, निरोगी होता है।
श्रद्धेय पंडित कपूर चन्द शास्त्री जी 

श्रद्धेय पंडित कपूर चन्द शास्त्री जी महाराज कहते हैं कि श्रावण मास में नियम संयम और विधि विधान से  सोमवार को आदि देव महादेव शिव जी की पूजा करने से भोलेभंडारी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।शास्त्री जी कहते हैं कि सोमवार व्रत करने से शिशुओं के रोग दूर होते है,साथ ही किसी भी प्रकार की दुर्घटना व अकाल मृत्यु से भी मुक्ति मिलती है।इतना ही नहीं  मनवांछित जीवनसाथी भी प्राप्त होता हैऔर वैवाहिक जीवन सुखमय व्यतीत होता है व भक्त का भगवान के प्रति आस्था बढ़ती है वो सत्संगी होता है जिससे जीवन में नकारात्मकता का नास होता है और सकारात्मकता का लास होता है।

शिव का महिना है सावन,ऐसे में सिव को प्रसन्न करने के लिए श्रावण सोमवार का व्रत नियम संयम से करना चाहिए,विधि विदान से करना चाहिए तभी मनवांछित फल प्राप्त होता है।ऐसे में क्या है सोमवार व्रत रखने में सावधानी...कैसे रखें व्रत...? परम पूज्य शास्त्री जी के अनुसार सोमवार का व्रत रखने वाले भक्तों को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए जो इस प्रकार हैं-

सोमवार व्रत के नियम विधान
v  व्रत करने वाले साधक को प्रात: ब्रह्म मुर्हत में उठना चाहिए व नित्य कर्म के बाद स्नान करने के लिए जल में कुछ काले तिल डालकर स्नान करना चाहिए।

v  ऐसे तो हम सब जानते हैं कि भगवान शिव का जलाभिषेक होता है,शिव जी को गंगा जल से स्नान करवाया जाता है लेकिन विशेष मनोकामना सिद्धि के लिए गाय का दूध, दही, घी, चने की दाल, सरसों तेल, काले तिल, शहद, कुश का जल आदि व कई अन्य सामग्रियों से भी अभिषेक किया जाता है।

v  इसके बाद ऊँ नमःशिवाय मंत्र के द्वारा सफेद यानि श्वेत फूल, पंचामृत, सुपारी, सफेद चंदन, चावल, ऋतु फल व गंगाजल से आदिदेव महादेव और माता पार्वती का साधक को पूजन करना चाहिए।

v  हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसी मान्यता भी है कि अभिषेक के समय पूजन विधि के साथ-साथ मंत्रों का जाप भी बेहद आवश्यक माना गया है,ऐसे में अपनी सरलता या सुलभता के अनुसार हम पुजा के समय महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र,या फिर भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र का जाप कर सकते हैं। मंत्र जाप में एक सावधानी अवश्य बरतनी चाहिए कि कहीं मंत्रों का उच्चारण गलत ना हो।

v  भगवान शिव व माता पार्वति की पूजा अर्चना के बाद श्रावण सोमवार व्रत कता का पाठ करना चाहिए और अपने परिवार के समस्त सदस्यों को कता महात्म्य बताना चाहिए।

v  इसके बाद प्रेम सहित सपरिवार भगवान शिव की आरती हानी चाहिए व सभी को प्रसाद वितरण करना चाहिए।

v  व्रत धारण करने वाले को बीना नमक के फलाहार ग्रहण करने चाहिए।

v  शिव भोले हैं,सत्य हैं सुंदर हैं और भक्तों की पुकार जल्द सुनते हैं अत:  श्रद्धापूर्वक व्रत करें।यदि पूरे दिन व्रत रखना किसी कारण वश सम्भव न हो तो सूर्यास्त होने तक व्रत रकें और फिर पारण कर लें।

v  हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दूध को चंद्रमा से संबंधित ग्रह कहा जाता है, क्योंकि दूध और चंद्रमा दोनों की प्रकृति शीतलता प्रदान करने वाली होती है।इसीलिए जो साधक चंद्र ग्रह से पीड़ित हो उसे अपने समस्त दोषों के निवारण हेतू सोमवार को शिवलिंग पर दूध अवश्य अर्पित करना चाहिए।

v  अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ती के लिए साधक को शिवलिंग पर नित्य प्रति गौ माता का कच्चा दूध ही अर्पित करने चाहिए।


इस प्रकार से भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हम नियमों का पालन करें और पूरे विधि विधान से साधना करें तो अवश्य ही भोलेभंडारी की कृपा हम पर बरसेगी और सभी मनोकामनाओं की पूर्ती होगी।हम तो यही कामना करते हैं कि आदिदेव महादेव माता पार्वती आपकी सभी मनोकामनाओं को पुरा करें।ऊं नम:  शिवाय।

Monday, 18 July 2016

सावन (श्रावण) के पवित्र माह में क्या करें,क्या ना करें

संदीप कुमार मिश्र: जो सुंदर हैं,सत्य हैं,सरल और सुलभ हैं वो भगवान शिव हैं।जिनकी महिमा अपरंपार है अनंत है।ऐसी ही भोलेबाबा की महिमा के गुणगान पावन माह है सावन।कहते हैं शिव की आराधना से साधक को मुक्ति और भक्ति दोनो प्राप्त हो जाती है।
मित्रों सावन में कुछ कार्यों को हमारे धर्म शास्त्रों में वर्जित बताया गया है,क्योंकि हमारी जीवन शैली का हमारी साधना और सत्संग पर विशेष प्रभाव पड़ता है।इस लिहाज से जो भी भक्त भगवान शिव की आराधना करते हैं, उन्हें सावन माह में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए,जो इस प्रकार से हैं- 

दरअसल हमारे सनातन धर्म में या यूं कहें कि हिन्दू धर्म,अनेकानेक विविधताओं का संकलन है।हम सभी  हिन्दू धर्म को मानने वाले इस बात से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं कि हमारे धर्म और हमारी जीवन शैली में किसे उचित या फिर किसे अनुचित बताया गया है।इसीलिए ज्यादातर हमारे हिंदू परिवारों में नियम संयम से रहने की परंपरा का निर्वहन किया जाता है।आज की भागदौड़ भरी जींदगी में हम पर पाश्चात्य संस्कृति जरुर अपनी छाप ड़ाल रही है लेकिन फिर भी हमारे संस्कार,हमारी संस्कृति हमें हमारे नैतिक व सामाजिक मुल्यों का एहसास सदैव करवाती रही है।
पवित्रता का माह सावन
मनसा,वाचा,कर्मणा हम जिस प्रकार जगत जननी मां जगदम्बा के पावन नवरात्रे में नियम संयम से रहते हैं और उन दिनों में मांस, मदिरा का सेवन नहीं करते हैं,पूजा पाठ हवन,किर्तन का पाठ करते हैं ठीक उसी प्रकार से सावन के पवित्र महिने में हमें प्रत्येक कार्य बड़े ही नियम संयम से करने चाहिए। ऐसे तो हमारे धर्म शास्त्रों में मांसाहार सदैव के लिए वर्जित बताया गया है लेकिन खासकर सावन में मांसाहार पूरी तरह वर्जित बताया गया है।आप के मन में एक शंका जरुर होकि कि आखिर सावन माह में ऐसी क्या विशेषता है जो इसे अन्य महिनों से खास बनाती है।
सावन में प्रत्येक दिन महोत्सव
मित्रों जैसा कि हम सब जानते हैं कि चैत्र माह के पंचम महीने को सावन का महीना कहा जाता है।सावन का महिना धार्मिक,आध्यात्मिक हर प्रकार से महत्वपूर्ण है।ये महिना शिव भक्तों व सनादन प्रेमियों के लिए कियी महोत्सव से कम नहीं है। हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है 33 कोटि देवी देवताओं की आराधना करने के लि ए सबसे बेहतर और सुंदर माह है सावन।खासकर भगवान आशुतोष शिव,और माता पार्वती जी के साथ ही श्रीकृष्ण कन्हैया की आराधना सावन में की जाती है।हम सब जानते हैं कि सावन के महिने में कीट-पतंगे को सक्रियता बढ़ जाती है,ऐसे में मनुष्य को भी अपनी साधना और पाठ-पूजा को इस महिने में बढ़ा देना चाहिए,सत्संगी बन भजन किर्तन करना चाहिए।
झमाझम बरसात का माह सावन
सावन बारिशों का महिना है,इस माह में मूसलाधार बारिश होती है,जिससे जन धन का नुकसान भी होता है, इसलिए भी आदिदेव महादेव पर जलाभिषेक कर उन्हें शांत किया जाता है। आपको बता दें कि हमारे देस के महाराष्ट्र राज्य में जल स्तर को सामान्य रखने की एक अनोखी प्रथा विद्यमान है। वहां के लोग सावन माह में समुद्र में नारियल अर्पण करते हैं,जिससे कि किसी प्रकार की जन हानी ना हो।
विष पान के तपन को शांत करते हैं इंद्र देव
एक पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष पीने से महादेव के शरीर की तपन बढ़ गयी थी।जिसे शांत और शीतल रखने के लिए भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया और मेघराज इंद्र नें भोलेबाबा के शरीर के तपन को शांत करने के लिए तेज मूसलाधार बारिश की।यही कारण है कि सावन माह में अत्याधिक वर्षा होती है।
बम बम भोले की गुंज,तप और व्रत
दोस्तों सावन में आप सड़कों पर केसरीये रंग से रंगे लोगों को हाथ में कांवड़ लिए जरुर देखते होंगे। भगवान शिव के भक्त कावड़ ले जाकर पतित पावनी गंगा का पानी भगवान शिव की प्रतिमा पर अर्पित कर अपनी भक्ति और भोले को प्रसन्न व शांत करने का प्रयत्न करते हैं,साथ ही सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं। क्योंकि सावन में व्रत रखने का विशेष महत्व है।कहते हैं कि जो कुंवारी लड़की सावन माह का संपूर्ण व्रत रखती है उसे मनोवांछित वर प्राप्त होता है। जैसा कि एक कथा के अनुसार माता पार्वती को शिव जी मिले थे।


सावन में माता पार्वती को मिले भगवान शिव
पुराणों में ऐसा वर्णित है कि जब अपने पिता दक्ष द्वारा अपने पति का अपमान होता सती जी ने देखा तो उन्होने आत्मदाह कर लिया था।और अगले जन्म में पार्वती के रूप में सती जी ने महादेव को पाने के लिए सावन के सभी सोमवार का व्रत किया था।जिसके फलस्वरूप भगवान शिव माता पार्वती को पति रूप में मिले थे।

वैज्ञानिक नजरीये से भी मांसाहार का सेवन सावन में ना करें
पौराणिक धार्मिक मान्यताओं के बारे में हम जान गए लेकिन सावन के महीने में मांसाहार परहेज करना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि सावन मास में भरपूर बारिश होती है, जिससे कि कीड़े-फतिंगे सक्रिय हो जाते हैं।जो हमारी सेहत के लिए ठीक नहीं होता है,वहीं जीव जन्तु,पशु-पक्षी, जिस स्तान पर रहते हैं, वहां साफ-सफाई विशेष रुप से नहीं होती है, जिससे कि संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए मांसाहार को वर्जित कहा गया है। आपको बता दें कि आयुर्वेद में भी सावन माह में मांस के संक्रमित होने की संभावना ज्यादा बताई गई है

अंतत: मित्रों सावन तो प्रेम का महिना है,मिलन का महिना है,सत्संग का महिना है,गीत गायन का महिना है।सावन के पवित्र माह में मछलियां और पशु, पक्षी सभी में गर्भाधान की संभावना बढ़ जाती है।और किसी भी गर्भवती मादा की हत्या कम से कम हमारे हिन्दू धर्म में महापाप माना गया है, इसलिए भी सावन के महीने में जीव हत्या वर्जित है।

भोलेभंडारी भगवान शिव तो प्रेम के भूखे हैं,भाव के भूखे हैं।जैसे वो त्रिलोकीनाथ जगत की सुनते है,वैसे ही हम सब के कष्टों को दूर करेंगे ऐसी ही कामना है।प्रेम से बोलिये...बम बम भोले...हर हर महादेव।

Saturday, 16 July 2016

सावन महात्म्य और शिव महिमा

संदीप कुमार मिश्र: हमारे देश में हर दिन,हर माह खास होता है,आस्था और परंपरा की जननी भारत में ऐसे तो बारहों महिने विशेष हैं लेकिन जब बात सावन की हो तो मन बावरा हो जाता है..आसमान में बदरी छा जाती है..हर तरफ हरियाली नजर आने लगती है मन मयूर नाचने लगता है। ऐसा लगता है मानों प्रकृति ने एक नई अंगडाई ली है।सावन का ये पाक और पवित्र माह ज्ञानार्जन के लिए भी विशेष महत्व रखता है।हमारे जीवन में सुख और शांति का ध्योतक है सावन।सावन में चहुंओर झमाझम बारिश होती है।ऐसा प्रतित होने लगता है जैसी प्रकृति बोल रही है,गुनगुना रही है,कुछ कहना चाहती है,सुनाना चाहती है।सावन तो एक ऐसा एहसास है जिसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है,सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है इसे।
वहीं दूसरी तरफ कहा जाता है कि आध्यात्म के नजरिये से भी ये पाक महिना अतिविशेष है।धर्मग्रंथों का अध्ययन,सत्संग,भजन का इन दिनो महत्व बढ़ जाता है।मानव जीवन में सुख शांति के लिए हमें पठन पाठन करना चाहिए। धर्मिक नजरिये से समस्त प्रकृति को आदिदेव महादेव भगवान शिव का रुप बताया गया है।यही वजह है कि प्रकृति की पूजा के रुप में पूरे सावन भर भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।सावन के महीने में अत्यधिक वर्षा होती है। और हर तरफ शिवालय हो या देवालय हर तरफ भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है,और सुख शांति की प्रार्थना की जाती है।
सावन में शिव पूजन क्यों ?
जैसा कि हमारे धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से अमृत के साथ विष भी निकला था।जिसे ग्रहण करने के लिए क्या देव,क्या दानव कोई भी आगे नहीं आया,तब जाकर भगवान शिव ने जगत के कल्याण के लिए विषपान किया।ऐसा कहा जाता है कि जिस माह में महादेव ने विषपान किया था,वो सावन माह था। विषपान करने से भगवान शिव के तन का ताप बढ़ता गया,बढ़ता गया,जिसे शांत करने के लिए देवों ने शीतलता प्रदान की,लेकिन इससे भी शिव की तपन शांत नहीं हुई।स्वयं आशुतोष भगवान शिव ने शीतलता पाने के लिए चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया।जिससे उन्हें शीतलता मिली।वहीं देवराज इंद्र में आदिदेव के ताप को शांत करने के लिए घनघोर वर्षा की जिससे भगवान शिव को शांति और शितलता मिल सके।इसी घटना के बाद से सावन के माह में शिव जी को प्रसन्न व शितलता प्रदान करने के लिए जलाभिषेक किया जाता है। 

सावन माह की क्या है विशेषता  
दरअसल सावन के पाक और पवित्र महिने को आदिदेव महादेव भगवान शिव का माह माना जाता है,जिसके पीछे पौराणिक कथा है कि देवी सती ने जब अपने पिता महाराज दक्ष के घर में योगशक्ति से अपने शरीर का त्याग कर दिया था, तब वो शरीर त्यागने से पूर्व भगवान शिव को हर जन्म में अपने पति के रुप में पाने का संकल्प व प्रण किया था।वहीं जब अपने दूसरे जन्म में देवी सति हिमालय और देवी मैना के घर में पार्वति के रुप में जन्म लेती हैं तो अपने यूवावस्था में ही निराहार रहकर कठोर तप और साधना कर भगवान शिव को प्रसन्न करती हैं,जिसके बाद भगवान शिव,भोलेभंडारी से विवाह करती है।तभी से सावन का ये पवित्र माह विशेष रुप से भक्तों के लिए फलदायी माना जाने लगा।
शिवालयों में लगती है भक्तों की कतार
मित्रों सावन और भगवान शंकर, यानी भक्ति की एक ऐसी अविरल धारा, जहां वातावरण हर हर महादेव और बम बम भोल की गूंज पवित्र हो उठता है और भक्तों कष्टों को दूर करने वाला होता है,यही तो वो पाक महिना है जब सभी प्रकार के मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।ऐसे तो हम सभी जानते हैं कि भगवान शिव की पूजा के लिए सोमवार का दिन विशेष होता है, लेकिन हमारे पौराणिक धर्मग्रंथों में कहा गया है कि महादेव की पूजा-आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन महाशिवरात्रि,के बाद संपूर्ण सावन माह ही है।क्योंकि भोलेनाथ को सावन यानी श्रावण माह अतिप्रिय है। इस पावन माह में साधक सोमवार का व्रत –उपवास, पूजा पाठ तो करता ही है,साथ ही रुद्राभिषेक,कवच पाठ भी करता है,जिससे विशेष लाभ प्राप्त होता है।हमारे सनातन धर्म संस्कृति में सावन के पवित्र माह में मांसाहार वर्जित बताया गया है।जिसका पालन प्रत्येक सनातनी को अवश्य करना चाहिए
सावन में महादेव की पूजा
भारत जैसे विशाल देश में,जहां कण कण में ईश्वर का वास बताया गया है,वहां के सभी शिवालयों में सोमवार के न ही नहीं, हर दिन हर-हर महादेव के जयकारे ही सुनाई देते हैं। सावन यानी श्रावण माह में शिव की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। शिव पूजन का प्रारंभ भक्त महादेव के अभिषेक से करते हैं और क्रमश: दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।वहीं अभिषेक के बाद बेलपत्र, समीपत्र, दूर्बा, कुशा, कमल, नीलकमल, ऑक मदार, जंवाफूल कनेर, राई फूल आदि से शिवजी पर चढ़ाते हैं,जो कि भगवान शिव को अतिप्रिय है। इसके साथ की भोग स्वरुप भांग धतूरा व श्रीफल भगवान आशुतोष पर चढ़ाते हैं।
शिवभक्त कांवड़ लेकर जाते हैं शिव के धाम

श्रावण माह में देश के भर के शिवभक्तों में एक विशेष उत्साह लेकर आता है।क्योंकि सभी शिवभक्त कांवरियों में जल भरकर शिवधाम की ओर चल पड़ते हैं और शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हुए बोल बम के नारे लगाते हैं।हर तरफ बोल बम का उदघोष वातावरण को पवित्र बना देता है।धन्य हैं भगवान भोलेनाथ और धन्य है उनकी महिमा।।