Monday, 30 November 2015

ISIS : 21वीं सदी का भस्मासुर...!


संदीप कुमार मिश्र: आतंक का ISIS  रुपी दानव आज विश्वभर में मानवता के लिए चिंता का सबब बना हुआ है।भस्मासुर के रुप में ISIS अपना जाल फैलाता जा रहा है,जिससे मानवता कराह रही है।मानवता का दुश्मन बन गया है ISIS। आखिर कब लगेगी लगाम,कैसे होगा इस भस्मासुर का खात्मा।क्योंकि जब तक इसका अंत नहीं होगा तब तक लोग यूं ही मरते रहेंगे,दहशत में जीते रहेंगे,और उपरवाले से फरियाद करते रहेंगे।क्योंकि पिधले दिनो फ्रांस के पेरिस में 13 नवंबर को जिस तरह से रात हुए आतंकवादी हमलों के बाद विश्व के सभी देश ISIS  से निपटने के लिए संकल्प ले रहे हैं।उससे आप आसानी से ये समझ सकते हैं कि ISIS विश्व के लिए कितना बड़ा खतरा बन चुका है।

दरअसल ISIS को 21वीं सदी का भस्मासुर कहने के पीछे कई कारण है। ISIS एक चरमपंथी संगठन है। इसके मंसूबे कितने ज्यादा खतरनाक हैं आप इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।आपको जानकर हैरानी होगी कि ISIS ने , इराक, यमन, सऊदी अरब, अल्जीरिया, इजिप्ट, लीबिया, पाकिस्तान अफगानिस्तान, सीरिया को अपना राज्य घोषित किया है। ISIS अब सीरिया और इराक में अपने मंसुबे मे कामयाब होकर यूरोप में भी दस्तक देने लगा है। फ्रांस में अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देने से पहले ISIS के एक सहयोगी संगठन ने सिनाई में आत्मघाती हमला किया था जिसमें चार पुलिसकर्मी मारे गए थे ।

वहीं 31 अक्टूबर को सिनाई में ही रूसी विमान को मार गिराना,जिसमें 224 लोगों की जान गई,साथ ही 12 नवंबर को बेरूत में दोहरे बम विस्फोट, जिसमें 43 लोगों की गई जान। पहले पश्चिम एशिया और अब यूरोप में खूनी खेल खेलना ISIS ने शुरू कर दिया है।जहां ISIS नहीं पहुंच पाता वहां उससे प्रेरित संगठन आतंक फैला रहे हैं।ये भस्मासुर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, और बच्चों के साथ इतनी निर्दयता से पेश आ रहे हैं,उनकी हत्याएं कर रहे हैं,जिसे देखकर मानवता भी कांप जाए। धर्म और मजहब के नाम पर मानवता को बांटने वाले इन दानवों का कोई धर्म और मजहब नहीं है।

अब समय आ गया है कि मानवता के दुश्मन ISIS का खात्मा करने किए विस्व समुदाय एक हों और निर्दयता से इनका दमन करे,जिससे हर तरफ चैनओ सूकून कायम हो सके।इसके लिए जरुरी है कि विश्व पटल पर योजनाएं और रणनीति बनाई जाए। विश्व के सभी शक्तिशाली देशों को आतंकवादी संगठन ISIS के खात्मे के लिए एकजुट होकर वैश्विक प्रयास करने होंगे जो काफी हद तक अब किये जा रहे हैं।अब सभी राष्ट्र ये समझने लगे हैं कि ISIS से निपटना किसी एक देश के बस की बात नहीं है और इसके लिए एकजुट प्रयास ही सफल हो पाएंगे।अमेरिका, रुस, फ्रांस और ब्रिटेन लगातार ISIS के ठीकानों पर हवाई हमले कर रहे हैं बावजूद इसके ISIS का दायरा बढ़ता जा रहा है।जिसके लिए कड़ी से कड़ी रणनीति बनानी होगी और आक्रामक होना पड़ेगा।

आज विश्व को लगने लगा है कि बैड टैररिजम और गुड टैररिजम नहीं होता....टेररिजम तो सिर्फ टैररिजम होता है...उसका कोई इमान धर्म नहीं होता।भारत लगातार आतंकवाद पर बोलता रहा है और जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र को आतंकवाद को परिभाषित करने की जरूरत है।आतंकवाद का पूरजोर विरोध करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने दुनिया को एक आवाज में आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने और उन देशों को अलग-थलग करने के लिए कहा जो आतंकवादियों को पनाह देते हैं।

बड़ा सवाल उठता है कि ISIS को पैदा करने का जिम्मेदार कौन..?ये बात जानते सभी हैं लेकिन आवाज कोई नहीं उठाता,क्योंकि अपनी ताकत का एहसास और क्षेत्रीय प्रभुत्व जमाने के साथ ही अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए कुछ देश ने ही ISIS रुपी भस्मासुर को पैदा किया। मीडिया रिपोर्टों पर विश्वास करें तो ISIS के वजूद के पीछे कोई और नहीं बल्कि अमेरिका ही है।अब तो अमेरिका भी मानता है कि इजरायल तक तेल की पाइपलाइन बिछाने के लिए सीरिया में असद सरकार को सत्ता से हटना जरूरी है। उसने जो बोया है आज दुनिया उसे काट रही है। वहीं कहना गलत नहीं होगा कि ISIS को खड़ा करने में कुत और राष्ट्र जैसे टर्की, सऊदी अरब के सात कतर की भूमिका को भी हम नकारा नहीं सकते।जी-20 के सम्मेलन में जब रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ये कहते हैं कि जी-20 के कुछ देश भी ISIS को फायदा पहुंचा रहे हैं तो उनके इस दावे में सच्चाई भी नजर आती है क्योंकि पुतिन ने कहा है कि ISIS तेल का गैरकानूनी कारोबार करता है। जिसे खत्म करने की जरूरत है। तभी विश्व से ISIS रुपी भस्मासुर का खात्मा हो पाएगा।


अंतत: कहना गलत नहीं होगा कि ISIS विश्व का सबसे निर्दयी,खूंखार आतंकी संगठन बन चुका है।जिसे जड़ से खत्म करना बेहद जरुरी हो गया है,और ये तभी संभव है जब सभी ताकतवर देश अपने व्यक्तिगत हीतों से उपर उठकर सोचेंगे। और आतंकवाद को दो तराजू से ना तौल कर एक ही सांचे मे रखकर देखना होगा।क्योंकि लहू का रंग लाल ही होता है,चाहो वो गोरे का हो,काले का हो या फिर किसी धर्म,मजहब,सम्प्रदाय का हो। मानवता की कराह और दर्द को जब तक मिलकर नहीं सोचेंगे तब तक यूं ही मौत का तांडव ISIS मचाता रहेगा।इसलिए जरुरी है कि ISISका समूचा विश्व मिलकर डट कर मुकाबला करे।