Monday, 30 November 2015

गिरफ्त में ISI के नापाक एजेंट

संदीप कुमार मिश्र: आज विश्व में शायद ही कोई ऐसा देश होगा जहां आतंकी गतिविधियां ना संचालित हो रही हो।भारत आजादी के बाद से ही इसका शिकार रहा है।पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के नापाक मंसुबों से लगातार देश संघर्ष कर रहा है।और इसके पाकिस्तान देश में बैठे गद्दारों से लगातार संपर्क बनाए हुए है।लेकिन सीमा पर खड़े इस देश के वीर सपूतों नें पड़ोसी मुल्क के नापाक मंसुबों को हर बार विफल कर दिया और कर रहे हैं।
दरअसल भारत की जासूसी के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI  व्हाटसएप और वाइबर नेटवर्क के जरिए सूचनाएं भारत भेजता था। वहीं ISI के एजेंट कैफीयतुल्ला खान और अब्दुल रशिद ईमेल, व्हाट्सएप के साथ ही वाइबर के जरिए खुफिया जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाता था।आपको बता दें कि ये दोनों जासूस भारत के नागरिक हैं, लेकिन काम पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए कर रहे थे।लेकिन इनके नापाक मंसुबों का पर्दाफाश हो गया और अब इन दोनो एजेंट्स को गिरफ्तार करने के बाद पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है।
आप सोच सकते हैं कि जब देश में ही गद्दार भरे पड़े हों तो बाहरी आक्रमणकारीयों को कितनी आसानी हो सकती है..खैर पुलिस इन गद्दारों से और भी जानकारीयां हासिल करने की कोशिश कर रही है,कि अब तक इन गद्दारों के जरिए किस किस प्रकार की जानकारी ISI को प्रदान की गई है सात ही पुलिस अब्दुल रशिद के अब तक लिए गए सिम कार्ड्स की जानकारी भी खंगाल रही है।
आपको जानकर अचंभा होगा कि विगत 2 साल में ही इन दोनों ने देश में जासूसों की लंबी फौज खड़ी कर दी थी, जो हमारे देश के हर हिस्से में गद्दारी का काम कर रहे थे।आपको बता दें कि 2013 में पहली बार कैफीयतुल्ला पाकिस्तान गया था और वहां से लौटने के बाद देश के साथ गद्दारी का काम शुरु कर दिया ।इन दोनो गद्दारों ने चंद रुपयों पैसे की खातिर सैन्य बलों और भारतीय सेना से जुड़ी खुफिया सूचनाएं साझा करने लगे से अब दोनो ने स्विकार भी कर लिया ।

दरअसल खुफिया जानकारीयों को पहले अब्दुल राशिद,अपने साथी  कैफीयतुल्ला को देता था और फिर कैफीयतुल्ला उन जानकारीयों को ISI को बताता था।जैसे कि भारतीय सीमा पर बीएसएफ के कितने पोस्ट है ?,साथ ही  किस पोस्ट पर कितने सैनिक रहते हैं?,इसके अलावा ये भी कि पोस्ट पर कैसी सुरक्षा व्यवस्था है ?, सैनिकों के पास किस तरह के हथियार हैं ?, एयर ऑपरेशन की भी जानकारी अब्दुल राशिद,और कैफीयतुल्ला देते थे।
राष्ट्र की सुरक्षा के साथ इस प्रकार से किसी को गद्दारी करने का अधिकार नहीं है। लेकिन एक बीएसएफ कर्मी और चार संदिग्ध ISI एजेंटों की गिरफ्तारी के साथ दो अलग-अलग घटनाओं में जम्मू और कोलकाता में ISI से जुड़े जासूसी गिरोह का पर्दाफाश किया गया। एक ओर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली और राजौरी से ISI के लिए काम करने वाले दो एजेंटों को पकड़ा, तो दूसरी तरफ कोलकाता में भी 3 एजेंटों का धर दबोचा गया।आपको जानकर जरा भी हैरानी होगी कि कोलकाता से जो ISI  के 3 एजेंट पकड़े गए उनमें से एक पिता-पुत्र हैं तो तीसरा उनका ही रिश्तेदार निकला।कुथ और पहले नजर ड़ालें तो मेरठ से एक ISI एजेंट और कोलकाता से पहले भी 2 जासूसों को पकड़ा गया था ।

अंतत: आप सोच सकते हैं कि जब देश में गद्दारों की फौज खड़ी हो तो सबसे पहले किसका दमन करने की जरुरत है...?,क्योंकि कोई भी राष्ट्र तभी सशक्त बन सकता है जब वहां के नागरीक देश के प्रति इमानदार हों।सरकार को इस तरह के देश विरोधी तत्वों से कड़ाई से पेस आना चाहिए और ऐसी ताकतों का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए।क्योंकि तभी सशक्त भारत का निर्माण होगा और एक भारत श्रेष्ठ भारत बन पाएगा।