Monday, 16 October 2017

शुभ दिवाली 2017 : जाने किस मंत्र से होंगी मां लक्ष्मी प्रसन्न,करें उपाय घर में आएगी खुशियां

संदीप कुमार मिश्र: दीपों का त्योहार दीपावली।जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। देश के हर हिस्से में लोग दीपावली का बड़े ही बेसब्री से इंतजार करते है।उल्लास और उमंग का त्योहार दिवाली हममें नई उर्जा का संचार करता है।दिवाली के पावन अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है,जिससे की मां लक्ष्मी की कृपा हम पर सदैव बनी रहे।यही वजह है कि दिवाली के खास अवसर पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए साधक कई तरह के उपाय करते हैं।
दीपों के त्योहार दिवाली में घर की साफ सफाई की जाती है और दिवाली के दिन घर के हर हिस्से में दीए जलाए जाते हैं और पूरे घर को रौशन किया जाता है। कहते हैं दीवाली के दिन जिस भी परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा हो जाए उस परिवार में कभी भी धन संपदा की कमी नहीं होती ।चलिए आपको भी बताते हैं कि आप कैसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न...किस मंत्र के जाप से होगी आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी...
इन मंत्रों से करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न
दिवाली पर मां लक्ष्मी के अलग-अलग नाम का करें जाप-
ॐ आद्यलक्ष्म्यै नम:, ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:, ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:, ॐ अमृतलक्ष्म्यै नम:, ॐ कामलक्ष्म्यै नम:, ॐ सत्यलक्ष्म्यै नम:, ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:, ॐ योगलक्ष्म्यै नम:.
ऊं अपवित्र: पवित्रोवा सर्वावस्थां गतो पिवा ।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर:।।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

दिवाली में मां लक्ष्मी की पूजा में उपयोग में आने वाली सामग्री
दिवाली के शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा में कलावा, अक्षतरोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश के लिए आम का पल्लव(पत्ता), चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी , अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली, कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन पूजन सामग्री का इस्तेमाल मां लक्ष्मी की पूजा में करें।
जाने विधिवत दिवाली पूजा की विधि
दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश के पूजन शुरू करने से पहले चौकी को अच्छी तरह से धोकर उसके ऊपर सुंदर रंगोली बनाएं, फिर चौकी के चारों तरफ दीपक जलाएं। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्‍थापित करने से पहले थोड़े से चावल रख लें। मां लक्ष्मी को प्रसन्‍न करने के लिए उनके बाईं ओर भगवान विष्‍णु की प्रतिमा को भी स्‍थापित करें।यदि आप किसी पंडित को बुलाकर पूजन करवा सकें तो बेहतर नहीं तो स्वयं मां लक्ष्मी का पूजन करें जिसके लिए सबसे पहले पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल, मिठाई, मेवा, सभी सामग्री थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर इस त्योहार के पूजन के लिए संकल्प लें। सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें और इसके बाद आपने चौकी पर जिस भगवान को स्थापित किया है उनकी भी पूजा करें। इसके बाद कलश की स्‍थापना करें और मां लक्ष्मी का ध्यान करें।दिवाली के दिन मां लक्ष्मी को लाल वस्‍त्र अवश्य पहनाएं।
जाने क्यूं मनाते है दिवाली क्‍या है इसका महत्‍व
हमारे देश भारत में ऐसे तो सभी त्योहारों का महत्व है लेकिन दिवाली का विशेष महत्व है।दिवाली पर हम घरों और दूकानों को सजाते और संवारते हैं, उनकी साफ-सफाई करते है।खासकर इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करते हैं।
दरअसल हमारे हिन्दू धर्म के अनुसार दीपावली के दिन सिर्फ धन की देवी महालक्ष्मी की ही नही विघ्न-विनाशक भगवान श्री गणेश और माता सरस्वती देवी की भी पूजा-आराधना की जाती है। कहते हैं कि कार्तिक मास की अमावस्या की आधी रात में देवी लक्ष्मी धरती पर आती हैं और हर घर में जाती हैं। जिस घर में स्‍वच्‍छता और शुद्धता होती है वहीं पर मां लक्ष्मी निवास करती हैं।
धनतेरस से भाईदूज : 5 दिनों तक विशेष त्योहार
दोस्तों आपको बता दें कि शुभ दीपावली धनतेरस, नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन का मिश्रण है। हम सब जानते हैं कि नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली भी कहा जाता है।वहीं दीपावली की शुरूआत धनतेरस से हो जाती है जो कि कार्तिक अमावस्या के दिन पूरे चरम पर आती है। 
मुख्य त्योहार और महत्‍वपूर्ण तिथियां
धनतेरस: 17 अक्टूबर 2017
छोटी दीवाली: 18 अक्टूबर 2017
दिवाली: 19 अक्टूबर 2017
गोवर्धन पूजा: 20 अक्टूबर
भाईदूज: 21 अक्टूबर
जाने दीपावली क्यों मनाई जाती है

असत्य पर सत्य की विजय यानि जब भगवान श्री राम 14 वर्ष के वनवास के बाद माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे तब मनाई गई थी दिवाली।दरअसल वनवास दौरान प्रभू श्री राम लंकापति दशानन राजा रावण जिसने माता सीता का हरण कर लिया था,उसका वध किया था जिसे हमारे धर्म शास्त्रों सहित महाकाव्य रामायण में भगवान राम की जीत को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बताया गया है।सपरिवार जब भगवान राम अयोध्या लौटते हैं तो उत्साह और उमंग में हर तरफ दीये जलाए जाते हैं और खुशियां मनायी जाती है।तभी से दीपावली मनाई जाने लगी।

Diwali 2017: जाने शुभ दिपावली पर पूजा का शुभ समय व मुहूर्त


संदीप कुमार मिश्र: 19 अक्टूबर यानि कार्तिक अमावस्या के दिन दिवाली का त्योहार बड़ी ही धूमधाम के साथ देशभर में मनाया जाएगा।दिपावली के दिन धन संपदा की देवी मां लक्ष्मी और ऋद्धि सिद्धि के दाता भगवान गणेश की पूजा करने की मान्यता होती है।हमारे हिन्दू धर्म शास्त्रों में दिपावली में लक्ष्मी गणेश पूजन में प्रदोष काल का भी विशेष महत्व होता है।आपको बता दें कि दिन-रात के संयोग को ही प्रदोष काल कहा जाता है।

शुभ दिपावली के पावन अवसर पर इस बार शाम 5.43 से रात 8.16 तक प्रदोषकाल रहेगा। इसी समय में जन सामान्य को सुख-समृद्धि की कामना के लिए मां लक्ष्मी,भगवान गणेश और कुबेर जी का पूजन करना चाहिए। एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए वो ये कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा हमें शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए।

दरअसल इस बार दिपावली पर पूजा करने के लिए 3 शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। इन तीनों शुभ मुहूर्त में पूजा करने का अपना ही विशेष महत्व होता है।जी हां इन विशेष शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी के साथ ही भगवान विष्णु, गणेश और कुबेर जी की पूजा करने का भी विधान बताया गया है।
जानिए दिवाली पर पूजा का शुभ मुहूर्त
1.प्रदोष काल मुहूर्त
मां लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05.43 से 08.16 तक
वृषभ काल: शाम 7.11 से 9.06 तक

2. चौघड़िया पूजा मुहूर्त
सुबह: 6.28 से 7.53
शाम: 4.19 से 8.55

3.महानिशिता काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा का अवधि- 51 मिनट
महानिशिता काल- 11.40 से 12.31


आपको बता दें कि दिवाली के दिन अमावस्या तिथि आरंभ 00:13 (19 अक्टूबर) पर होगी और अमावस्या तिथि समाप्त 00:41 (20 अक्टूबर) पर होगी।।शुभ दिपावली।।

Diwali 2017: जाने इस दिवाली कहां जलाएं दीपक,जिससे हो सभी मनोकामनाएं पूरी


संदीप कुमार मिश्र : आस्थाओं,तीज,त्योहारों का देश है भारत। हमारे देश भारत में ऐसे तो हर त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन सभी त्योहारों में सबसे बड़े त्योहार के रुप में दिवाली का पावन त्योहार मनाया जाता है। कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली बड़ी ही धूमधाम से मनाई जाती है।हम सब जानते है कि इस साल दीपावली 19 अक्टूबर 2017 को देश भर में मनायी जाएगी।दरअसल दिवाली के त्योहार रौशनी का त्योहार है जिसकी एक अलग ही पहचान है।दिवाली पर रौशनी के लिए पारंपरिक तरीकों में दीयों को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है।
दीयों का विशेष महत्व
दीपावली पर दीए जलाने की अपनी एक अलग ही परंपरा हमारे देश में है।कहते हैं कि दिवाली पर दीए जलाने से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी प्रसन्न  होती है।साथ ही दीयों को हमारे धर्म शास्त्रों में शुभता के तौर पर भी देखा जाता है।ऐसे में ये जानना बेहद जरुरी है कि दिवाली पर कहां-कहां हमें दीए जलाने चाहिए-

दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने के बाद सबसे पहले उनकी तस्वीर के आगे घी का एक बड़ा दीया जलाना चाहिए।साथ ही पूरे घर में सरसो के तेल का दीपक जलाना चाहिए। खासतौर पर घर के मुख्य दरवाजे के दोनो छोर पर जरूर दीया जलाना चाहिए। घर के मंदिर में भी हमें दीया जलाना चाहिए।
इसके साथ ही घरों में मौजूद खिड़की,चौखट,बालकनी और छत पर भी दीए जलाने चाहिए। इतना ही नही घर के अन्न भंड़ार और घर की रसोई में भी दीया जलाना चाहिए।कहते हैं ऐसा करने से घर में सदैव अन्न भरा रहता है और अन्न की कोई कमी नहीं होती है।
दिवाली के शुभ अवसर पर घर के बाहर भी कई जगहों पर दीए जलाना हमारे धर्म शास्त्रों में शुभ माना गया है। घर के बाहर चौराहे पर नजदीक के मंदिर और दीवाली की रात में पीपल के पेड़ के नीचे दीया जलाने का भी विशेष महत्व है।

आईए इस हम सब मिलकर इस दिवाली पर ज्ञान का दीप जलाएं और परिवार,समाज और देश से अज्ञानता के अंधकार को मिटाएं।शुभ दिपावली।।

Dhanteras 2017: धनतेरस पर चमकेगी किस्मत,करें इस विधि से पूजा

संदीप कुमार मिश्र:  शुभ दिवाली से पहले हमारे सनातन धर्म में धनतेरस पर विशेष  पूजा अर्चना और खरीदारी की जाती है।जिसका कि विशेष महत्व होता है,धनतेरस के दिन धन और आरोग्य के लिए भगवान धन्वंतरी की पूजा की जाती है।धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है।कहते हैं कि धनतेरस के दिन ही आरोग्य के देवता भगवान धनवन्‍तरी का जन्‍म हुआ था जो कि समुन्‍द्र मंथन के दौरान अपने साथ अमृत का कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे।इसीलिए भगवान धनवन्‍तरी को औषधी का जनक भी कहा जाता है। धनतेरस के दिन बाजारों में रौनक देखते ही बनती है।इस दिन सोने-चांदी और अपनी जेब के लिहाज से लोग खुब खरीदारी करते हैं।हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से सोई किस्मत भी चमक जाती है।
 जाने कब की जाती है धनतेरस की पूजा
हमारे हिंदू पंचांग और धर्म के अनुसार धनतेरस का त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन यानि दिपावली के दो दिन पहले बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।दरअसल धन का भाव समृद्धि से है और तेरस का मतलब तेरहवां दिन होता है। धनतेरस यानी अपने धन को तेरह गुणा बढाने और उसमें वृद्धि करने का द‌िन ही धनतेरस कहलाता है।व्यापारियों के लिए धनतेरस का विशेष महत्व होता है, क्योंकि कहते हैं कि इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा से सुख,समृद्धि, खुशियां और सफलता मिलती है।

जानिए धनतेरस के दिन कब करें खरीदारी और कब है शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त धनतेरस वाले दिन शाम 7.19 बजे से 8.17 बजे तक का है।
कब करें किस चीज की खरीदारी-
काल- सुबह 7.33 बजे तक दवा और खाद्यान्न.
शुभ- सुबह 9.13 बजे तक वाहन, मशीन, कपड़ा, शेयर और घरेलू सामान.
चर- 14.12 बजे तक गाड़ी, गतिमान वस्तु और गैजेट.
लाभ- 15.51 बजे तक लाभ कमाने वाली मशीन, औजार, कंप्यूटर और शेयर.
अमृत- 17.31 बजे तक जेवर, बर्तन, खिलौना, कपड़ा और स्टेशनरी.
काल- 19.11 बजे तक घरेलू सामान, खाद्यान्न और दवा.
जाने धनतेरस की पूजा विधि
धनतेरस के दिन सबसे पहले मिट्टी का हाथी और धन्वंतरि भगवानजी की फोटो स्थापित करें। चांदी या तांबे की आचमनी से जल का आचमन करें।भगवान गणेश का ध्यान और पूजन करें। हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें।इसके बाद निम्न मंत्र का जाप करें-

देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान, दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः
पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो, धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः
ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि...
इस प्रकार भगवान धन्वंतरि की पूजा को संपन्न करें।आरती गाएं और घर परिवार समाज में सुख संबृद्दि की कामना करें।संबोधन की तरफ से आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Friday, 13 October 2017

जाने धनतेरस का महत्व,राशि के अनुसार कैसे करें खरीदारी और शुभ समय


*🕉 जाने 17/10/2017 को धनतेरस का महत्व व पूजन खरीददारी का शुभ समय व किस राशि के अनुसार क्या खरीदें* 🕉
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 *हिन्दू परम्परा में धनतेरस सुख-समृद्धिऔर वैभव का पर्व माना जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देव धन्वंतरि की पूजा की जाती है। हिन्दू परंपरा  के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन से ही दीपावली पर्व का प्रारंभ हो जाता है। इस साल यह पर्व 9 नवंबर, सोमवार को है।*

*कहा जाता है कि इसी दिन देवताओं के वैद्य धन्वंतरि अमृत कलश सहित सागर मंथन से प्रकट हुए थे, इसलिए तब से इस तिथि को भगवान धन्वंतरि का पूजन के रूप में तथा  प्रकटोत्सव के रूप में मनाया जाता है।*

    *🌸पूजन मुहूर्त*🌸
*शाम 06:24 से 07:08 तक*

*शाम 05:58 से रात 08:32 तक (प्रदोष काल)*

*शाम 06:24 से रात 08:24 तक (वृषभ लग्न)*

*🌼खरीददारी के लिए शुभ समय यह है:-*🌼
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*सुबह 9:20 से 10:40 बजे तक- शुभ*

*दोपहर 1:35 बजे से 3:00 बजे तक- चल*

*दोपहर 3:00 बजे से शाम 4:20 बजे तक- लाभ*

*शाम 4:20 बजे से 5:44 बजे तक- अमृत*

*शाम 5:44 बजे से 7:20 बजे तक- चल*

 *🕉 धनतेरस पर किस राशि के अनुसार क्या ख़रीदे :-*🕉
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*1.-🌼 मेष राशि:🌼 हो सके तो सोना खरीदे अन्यथा चाँदी या कपडे भी खरीद सकते है परतुं लोहे से निर्मित वस्तु तथा किसी भी तरह की चमड़े की वास्तु ना खरीदे।*

*2. -🌼वृषभ राशि: 🌼आप सोना, चाँदी, बर्तन  की खरीददारी करे चाहे तो लोहे से बनी वस्तु भी खरीद सकते है परन्तु लकड़ी व् चमड़े से बानी वस्तुए ना ख़रीदे।*

*3. -🌼मिथुन राशि🌼: आप लोगो के लिए ये  धनतेरस बहुत शुभ है अगर जमीन जायदाद का सौदा करेंगे तो बहुत लाभकारी रहेगा।*

*4.- 🌼कर्क राशि🌼: सफ़ेद वस्तु की खरीददारी आपके लिए बहुत शुभ रहेगी। चाहे तो नए वाहन भी ले सकते है।*

*5.-🌼 सिंह राशि🌼: आपके ऊपर शनि की ढय्या होने के कारण निवेश करने से बचे। कपडे वगरह खरीद ले परन्तु सोना, जमीन जायदाद या शेयर में पैसा ना लगाए।*

*6. -🌼कन्या राशि🌼 : जमीन आदि की खरीददारी करे शुभ रहेगा। और सोना, चांदी, कपडे आदि की खरीददारी भी आपके लिए शुभ रहेगी।*

*7. -🌼तुला राशि🌼 : अभी आप सोना चाँदी या फिर जमीन जायदाद में पैसा निवेश ना करे। ध्यान रखें समय अभी आपके लिए अनुकूल नहीं है।*

*8.-🌼 वृश्चिक राशि 🌼 सोना, चाँदी, बर्तन, कपडे वगरह खरीद सकते है पर लोहे से बना सामान और जमीन वगैरह ना खरीदे।*

*9.- 🌼धनु राशि :🌼 अभी समय आपके अनुकूल चल रहा है तो हो सके तो जमीन जायदाद, शेयर , चाँदी और सोने में पैसे निवेश करे।*

*10-🌼 मकर राशि:🌼 समय बहुत ही अच्छा है , सभी वस्तुओं के खरीद में फायदा प्राप्त करेंगें। वस्त्र एवं सोना विशेष फायदा देने वाला होगा।*

*11.-🌼 कुंभ राशि🌼 : स्थाई संपत्ति खरीदने से बचें बाकि उसके अलावा आप कुछ भी खरीद सकते है।*

*12.- 🌼मीन राशि🌼: सोना, चाँदी, कपडा, लकड़ी का सामान आदि खरीद सकते है।  बस शेयर और स्थाई संपत्ति में पैसा लगाने से बचे*


Wednesday, 11 October 2017

अहोई अष्टमी व्रत महात्म्य


संदीप कुमार मिश्र : मां इस धरा पर उस कल्प वृक्ष के  समान है जो हर परिस्थिति में अपने बच्चों की सुरक्षा और हिफाजत ही चाहती है।जैसे वृक्ष हमें बरसात ,आंधी , गर्मी  की तपिश से निजात दिलवाते है। उसी तरह मां भी उस वृक्ष के सामान है जो हमें जिन्दगी में आने वाले दुखों से हमेशा हमारी सुरक्षा  करती हैं।मां की शितल छाया का सुख हर कोई पाना चाहता है।मां की महिमा का गुणगान जितना ही किया जाए उतना ही कम है। मां,एक ऐसा शब्द,एक एसा नाम जिसके आंचल मे हर कोई समाना चाहता है।यहां तक कि भगवान भी इस सुख को पाने के ललायित रहते थे।जिसका परिणाम है कि कभी  राम रूप में तो कभी कृष्ण रूप में धरती पर अवतार लिए।हर दुख सहती हैं मां अपने बच्चों को कभी भी अपनें तकलिफों और परेशानीयों का अहसास नहीं होने देती है मां।
मां तो मां है। जिसका कर्ज  हम ताउम्र नहीं चूका सकते।अपने बच्चों को दुख में देख कर जो पलभर में हो जाती है परेशान वो पावन नाम है मां।हर प्रकार के सुख दुख सहकर और न जाने अपने कितने ही सुखों का  त्याग करती हैं मां अपने बच्चों के लिए।खासकर एसी ही होती हैं भारतीय मां अपने बच्चों के लिए।जिनके जुबान से हमेशा ही दुआएं निकलती है अपने बच्चों की खुशहाली , उन्नति, और अच्छे सौभाग्य के लिए।

इन्हीं दुआओं और आशीर्वाद का प्रतीक है, अहोई अष्टमी का व्रत।जिसे हर मां अपने बेटों की लम्बी आयु के लिए रखती हैं।ये व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है।दीपावली से ठीक एक हफ्ता पहले अष्टमी का व्रत होता है।शास्त्रों के अनुसार जिस वार को दीपावली होती है।उसी वार को अहोई अष्टमी का व्रत होता है।जो दीपावली से एक हफ्ता पहले होता है।कहते हैं कि अहोई अष्टमी के दिन से ही दीपावली का शुभारम्भ हो जाता है। पुत्रवती महिलाएं तो इस व्रत को रखती ही हैं साथ ही वो औरतें भी इस व्रत को रखती हैं,जिनके घर कोई औलाद नहीं होती।
महिलाएं इस दिन अपने बेटे की लम्बी आयू के लिए अहोई माता का व्रत रखती हैं और साथ ही माताएं अपने बेटों के लिए मांगती हैं उत्तम विकास और आरोग्यता के लिए देवी मां से वरदान।

अहोई माता की कथा
अहोई माता के संबंध में ऐसे तो कई कथाएं कही जाती हैं लेकिन सबसे प्रसिद्ध कथा है कि एक साहूकार  अपनी पत्नी चन्द्रिका,जो बड़ी गुणवती थी और अपनें दोनों बेटों के पूरा परिवार के साथ सुखी जीवन बिता रहा था।एक दिन साहूकार की पत्नी दीपावली के त्योहार को नजदीक आता देखकर घर को लीपने पोतने के लिए मिट्टी लेने गई। इस दौरान जब वो कुदाल से  मिट्टी खोद रही होती है तो सेई के बच्चे मर जाते हैं। वो ऐसा जान बूझ कर नहीं करती,बल्कि ये होता है अनजाने में।इससे वो काफी आहत होती है और व्याकुल होकर घर लौट आती है।लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी औलादों की एक एक करके मौत होने लगती है।अपने बच्चों की अचानक हुई मौत से साहूकार और उसकी पत्नी ये सोचकर परेशान होतें हैं कि उन्होंने आज तक कोई ऐसा  पाप नहीं किया, फिर भगवान क्यों उन्हें ये सजा दे रहें हैं।साहूकार की पत्नी अपने बच्चों की मौत पर विलाप करती हुई कहती है कि उसने आज तक जान बूझ कर कोई पाप नहीं किया।हां एक बार अनजाने में उससे सेह के बच्चे मारे गए थे।ये बात सुनकर सभी औरतों ने साहूकार की पत्नी को दिलासा देते हुए अष्टमी माता की पूजा करने को कहा। औरतों के कहने पर साहूकार की पत्नी ने सेह और उसके बच्चों का चित्र बनाकर अहोई माता की पूजा की और मां से हुए अपराध के लिए क्षमा याचना मांगी।तब देवी मां ने प्रसन्न होकर उसकी होने वाली औलाद को दीर्घ आयु का वरदान दिया।उसी समय से अहोई व्रत की ये परम्परा शुरू हो गई और तब से लेकर अब तक महिलाएं अपने बेटों की लम्बी आयु के लिए अहोई व्रत रखती आ रहीं हैं।

अहोई माता की पूजा का समय
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त = १७:५० से १९:०६
अवधि = १ घण्टा १५ मिनट्स
तारों को देखने के लिये साँझ का समय = १८:१८
अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय = २३:५३
अष्टमी तिथि प्रारम्भ = १२/अक्टूबर/२०१७ को ०६:५५ बजे
अष्टमी तिथि समाप्त = १३/अक्टूबर/२०१७ को ०४:५९ बजे

पहले औरतें अहोई माता का चित्र खुद ही बनाती थी। ये चित्र रूई या गेहूं के दानों से ,नीम के पत्तों को पीस कर, मिट्टी के साथ चावलों को पीस कर हल्दी मिलाई जाती थी,इसे रोला कहते थे।ये एक तरह का रंग होता था।इस चित्र में अहोई माता, सेई माता और उसके बच्चों के चित्र  बनाए जाते थे। लेकिन बदलते वक्त के साथ अब तो अहोई माता का चित्र बनाने की बजाए बाजार से अहोई माता का कैलेंडर या बनी बनाई मूर्ति लाई जाती हैं। खैर जो भी हो,आधुनिकता का रंग चढने के बाद भी हम परम्पराओं और मर्यादाओं की सीमा में बंधे हुए हैं और यही हमारे देश की पहचान है।माता अहोई आप सब की मनोंकामनाओं को पूरा करें।जय अहोई माता।